Tuesday, August 11, 2015

स्वच्छ भारत  अभियान; अजमेर का स्वच्छता के पैमाने पर पहले 400 शहरों में नाम ही नहीं।
स्वच्छ भारत - अजमेर फसड्डीयों में आगे। 
स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत के बाद 476 शहरों के सर्वे में अजमेर का कौन सा स्थान है ? यह जानने के बाद किसी भी जागरूक अजमेरी को गहरा झटका लग  सकता है।  इसी लिए थोड़ी भूमिका बनाने के बाद यह जानकारी दी जा रही है।

टॉप पर मैसूर, बंगलुरु आदि हैं तो फसड्डीयों में काफी हद तक हमारा अजमेर है। 401 वां स्थान है आज की तारीख में।


अजमेर के नुमाइंदों, अफसरों, आम नागरिकों और मंत्रियों को घोर निराशा हो गई  होती यदि सिर्फ 400 शहरों का ही सर्वे टाइम्स ऑफ़ इंडिया द्वारा करवाया गया होता।  धार्मिक नगरी, शिक्षा की राजधानी, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति आदि कई अलंकारों से सुसज्जित यह शहर गन्दगी और शर्मिंदगी की गर्त में किस गहराई में गिरा पड़ा है इसका अंदाजा शायद मोदी जी को नहीं था वरना ये स्मार्ट - स्मार्ट वाली अजमेर के मामले में घोषणा नहीं करते।
शायद 476 शहरों को ऐसी लियें सर्वे में लिया होगा क्योंकि 400 के बाद अजमेर का पहला नंबर है। याने हमें यह समझ कर आत्म संतुष्टि होगी कि आखरी 76 में (476 में से) हम टॉप पर हैं। ख़ास कर नगर निगम के इलेक्शन के मौसम में यह बात इस तरह से कहने सुनने में (की हम आखरी 76 में अव्वल हैं) मन को अच्छी भी लगेगी और वोटरों का दिल लुभाने में भी कामयाब रहेगी।

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स्वच्छ भारत - अजमेर फसड्डीयों में आगे।

स्वच्छ भारत - अजमेर फसड्डीयों में आगे। 
स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत के बाद 476 शहरों के सर्वे में अजमेर का कौन सा स्थान है ? यह जानने के बाद किसी भी जागरूक अजमेरी को गहरा झटका लग  सकता है।  इसी लिए थोड़ी भूमिका बनाने के बाद यह जानकारी दी जा रही है।

टॉप पर मैसूर, बंगलुरु आदि हैं तो फसड्डीयों में काफी हद तक हमारा अजमेर है। 401 वां स्थान है आज की तारीख में।

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Saturday, February 21, 2015

फिर एक आशाराम ! इस बार देश द्रोही के रूप में। पट्रोलियम मंत्रालय में ये "आशाराम" चपरासी के कार्य के साथ साथ "टॉप सीक्रेट" दस्तावेज कॉर्पोरेट्स को उपलब्ध कराने के संगीन जुर्म में जेल भेज दिया गया।
अजमेर के अच्छे दिन कब आएंगे ???

(1) हर वर्ष महा शिवरात्रि पर पूजा, अर्चना, ध्यान, साधना, रुद्राभिषेक, व्रत, उपवास, भंडारा, भांग, ठंडाई न जाने किन किन अन्य उपायों से महादेव को  मनाने में अपनी ऊर्जा खर्च करते हैं लोग। सामूहिकता में भजन कीर्तन वो भी फ़िल्मी धुनों पर, ये भी एक विधि है उसे जगाने की, याद दिलाने की। हरेक की अपनी समस्या है उसे वो सुनता है और दूर भी करता है, तभी तो सब फ़रियाद करते हैं।
अजमेर की समस्याओं का  रोना किसके आगे रोया जावे ???? ये सबसे गंभीर प्रश्न है! कौन है वो महादेव ? क्या वो मेयर है? कमिश्नर है या कलेक्टर है ? या यहां के वो चुने हुए नेता हैं जो मंत्री पदों को सुशोभित कर रहे हैं। विपक्ष में बैठे कांग्रेस के नेता हैं या सरकार से मोटी  मोटी तनखा उठाने वाला सरकारी तामझाम??

अजमेर के अच्छे दिन कब आएंगे ???

(2) दूसरा प्रश्न है शहर के महादेवों की स्तुति किस विधि से की जाये, कैसे उन्हें याद दिलाया जाये की शहर दिन पर दिन कम गंदे से ज्यादा से ज्यादा गंदा हो रहा है ? आना सागर पानी से भरा है लेकिन रोजाना इसमें हज़ारों लीटर तरल,  गन्दी  नालियों का मिक्स हो रहा है, झील के चारों ओर जगह जगह प्लास्टिक की थैलियां एवं अन्य तरह के कचरों का ढेर, उस ढेर में से छोटे छोटे बच्चे कुछ ढूंढ़ कर - बड़े बड़े बोरों  में भरते सुबह सुबह दिखते रहते है ! ये बच्चे शायद एक वक़्त की रोटी के जुगाड़ में अपनी जिंदगी की रोटी उस गन्दगी में  हैं?

ऐसे कई ज्वलन्त प्रश्न आज अजमेर शहर के नागरिकों के मन में हैं ?



अजमेर के अच्छे दिन कब आएंगे ???

(3) गन्दगी और सफाई! इस समस्या को लेकर अजमेर में "रन फॉर अजमेर" नामक दौड़ में  स्वच्छ और स्वस्थ अजमेर की मनो कामना लिए कई युवाओं, वृद्धों, मीडिया से पत्रकारों, कई अन्य संस्थानों के लोगों व् नगर निगम के अधिकारियों को भी बड़ चढ़ कर पूरे जोशो खरोश के साथ पटेल मैदान टू पटेल भागते देखा गया था। दिखावे के लिए शहर की मुख्य सड़कों की सफाई कर दी गयी थी।  सबने अपनी अपनी पीठ थपथपाकर कहा हमने वो कर दिया जो आज तक नहीं हुआ? ये तो सही है की बहुत अच्छा काम किया।  लेकिन मीडिया को ये नहीं भूलना चाहिए कि जब महादेव को ही रोज़ रोज़ अपनी समस्याएं स्मरण करानी पड़ती हैं तो आज के इन महादेवों को क्या "RUN for AJMER" की सिर्फ एक डोज़ काफी है?

अजमेर के अच्छे दिन कब आएंगे ???
(4) जनता जनारदन के लिए तो मीडिया ही है नारद मुनि, जो कहीं भी जाकर जनसाधारण की बात सत्ता और पदों पर बैठे इन आज के महादेवों तक पहुंचा सकते हैं, उनसे मनवा सकते हैं। तो निष्कर्ष ये निकला कि प्रजा का महादेव तो मीडिया ही है। अजमेर का मीडिया और नागरिक दोनों साथ साथ जागें, आवाज़ बुलंद करें तो ही कुछ शहर के साफ़ होने की, विकास / प्रगति (ये भी बहस का मुद्दा है - क्या हो !!) होने की संभावना है।

(5) याने कि जनता मीडिया से, मीडिया पदाधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाए।  यहाँ "हम लोग" यह भी समझ लें कि आज का सबसे पावरफुल मीडिया है - सोशल मीडिया। जिसने आम आदमी की मीडिया पर निर्भरता को नगण्य सा कर दिया है। इ-मेल, फेसबुक, व्हट्सऐप, बल्क  ऐस.एम.एस, ब्लॉग, फोटो अटेचमेंट, वॉइस् मेल, विडिओ मेल आदि आपके हाथ में देकर।  समझो हर व्यक्ति के हाथ में कलम है, अखबार है, चैनल है, अपना खुद का मीडिया है। अपनी आवाज़ उठाने के साधन हैं।

 मैनें एक समस्या और उसका साधन आपके हाथ में ही है ऐसा आपको बताने का प्रयास किया है।  यदि आप भी अजमेर के लिए सोचते हैं तो आइये और करिये इस का उपयोग।
डॉ. अशोक मित्तल, 20 फर. 15

Thursday, February 19, 2015

अच्छे दिन आने शुरू हो गए हैं !!!

मोदी जी के १० लाख के सूट ने सबको अच्छे दिनों का अहसास कराया । सूट पहन कर ओबामा से चाय पर चर्चा। सूट पर अलग अलग रानीतिक दलों के नेताओं द्वारा कसे गए तानों की चर्चा। कीमत को लेकर चर्चा। कीमत के कयास लगे सात लाख से दस लाख। कहाँ से आया, किसने सिला, क्या लिखा है, कहाँ नाम लिखा है ? क्यों इतना महँगा? संसार में और किस नेता ने ऐसा नाम लिखा कपड़ा पहना? कई तरह की भिन्न भिन्न प्रतिक्रियाएं और विचार मंथन। पूरा मीडिया और पूरा इंडिया मानो इस "चर्चा रुपी स्वाइन फ्लू" से ग्रस्त हो गया।
मोदी जी ने भी अब सबको दी टेमीफ्लू रुपी गोली, लगवाकर उसी सूट की बोली। सूट की अकेले की बोली सवा करोड़ से ऊपर पहुंची है। अन्य गिफ्टों से धन आएगा सो अलग।  सारा पैसा चेरिटी में दान दे दिया जाएगा। याने कुछ एक जरुरत मंदों के तो अच्छे दिन आना पक्का ही है।
अन्य नेता भी अब तक ऐसा करते या आज से भी इस से सबक लेकर अनुसरण करें तो उम्मीद ही नहीं पक्की गारंटी है की सबके अच्छे दिन आएंगे !!!!
डॉ. अशोक मित्तल 19 -02 -2015

 


Tuesday, February 10, 2015

नगर निगम अजमेर का भी प्रेग. टेस्ट + पोसिटिव आया है।  अगस्त में होगी डिलीवरी।
विस्तृत विवरण "डीएनऐ रिपोर्ट" से पता चलेगा। मेयर A, B, C 

Monday, February 9, 2015

भाजपा की आशा की "किरण" (Kiran) ने मोदी के बेड़े के बाँधी बेड़ी (Bedi). मोदी ने आम आदमी की कजरी (Kejari) को किया चाय पर आमंत्रित। अरविन्द भाई मफलर और खांसी का ध्यान रखना।